श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को काँवड़ में बिठाकर तीर्थ यात्रा पर ले जा रहे थे।
इस घटना के बाद: * श्रवण कुमार के माता-पिता को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने राजा दशरथ को श्राप दिया कि जैसे पुत्र वियोग में उनकी मृत्यु हो रही है, वैसे ही राजा दशरथ की मृत्यु भी पुत्र वियोग में होगी।
पितृभक्त पुत्र श्रवण कुमार एक पौराणिक पात्र हैं
जिन्हें आज भी मातृ-पितृभक्ति के लिए जाना जाता हैं।
इतिहास में मातृभक्ति और पितृभक्ति के लिए श्रवण कुमार का नाम अमर हैं। हिन्दू धर्म ग्रंथ रामायण में श्रवण कुमार का उल्लेख है। सबसे खास बात यह है कि ये वही श्रवण कुमार हैं
जिनके माता-पिता के श्राप के कारण राजा पुत्र वियोग में राजा दशरथ की मृत्यु हुई थी।
एक बार उनके अंधे माता-पिता ने इच्छा जताई की उनके बेटे ने उनकी सभी इच्छाएं पूरी की है बस एक इच्छा बाकी रह गई है।
उन्होंने तीर्थयात्रा करने की इच्छा जताई। श्रवण कुमार ने माता-पिता की आज्ञा मानते हुए उन्हें प्राण रहते उनकी इच्छा पूरी करने का वचन दे दिया।
कंधे पर कांवर लेकर और उसमें दोनों को बैठाकर वह तीर्थयात्रा करने निकल पड़े। श्रवण अपने माता-पिता को कई तीर्थ स्थानों जैसे गया, काशी, प्रयाग आदि लेकर गए और उन्हें तीर्थ के बारे में सारी बातें सुनाते रहे।


