महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं, इसको लेकर मान्यता है कि इस दिन शिव और शक्ति का मिलन हुआ था।
यानी कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था,
इसलिए इस दिन व्रत किया जाता है और शिवजी के साथ गौरा यानी कि मां पार्वती की पूजा होती है।
पौराणिक कथाओं में यह भी कहा गया है
कि महाशिवरात्रि शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक है. फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवजी ने वैराग्य का त्याग कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया और माता पार्वती से विवाह किया. इसी कारण, हर वर्ष शिव-गौरी के विवाह उत्सव के रूप में महाशिवरात्रि का आयोजन किया जाता है.
भक्तों का मानना है
कि मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव का उपवास और पूजा करने से आध्यात्मिक शुद्धि होती है।
ऐसा कहा जाता है
कि यह दिन पिछले पापों को दूर करने में मदद करता है और भक्त को मोक्ष (आध्यात्मिक मुक्ति) प्राप्त करने के करीब लाता है


