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Wednesday, May 13, 2026
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सान्याल स्वतंत्रता पूर्व से ही आधुनिक भारतीय कला जगत में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।

सान्याल स्वतंत्रता पूर्व से ही आधुनिक भारतीय कला जगत में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। उनके सभी चित्र मानवतावादी भावना के उदाहरण हैं और उनमें मानवीय करूणा, सहानुभूति तथा संवेदनशीलता के दर्शन होते हैं

भारत में स्वतंत्रता आंदोलन जब अपने चरम पर था उसी समय से कुछ प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपने-अपने स्तर पर अपनी कला शैली द्वारा कला आंदोलन चलाने की कोशिश की उन्होंने भारतीय पारंपरिक, ऐतिहासिक कला का महत्व समझा।

बिजूका और मैं, तैल 1977,चित्रकार- भवेश चंद्र सान्याल, साभार: समकालीन कला, प्र॰ राष्ट्रीय ललित कला अकादमी

निस्संदेह लोक कला का अपना एक सौंदर्य ‌और सरल स्निग्ध धारा रही है।

लेकिन लोक कला का एक वैचारिक और सृजनात्मक पक्ष ये भी रहा है इसमें सदियों पुरानी रूढ़ियां, गाथाओं, किंवदंतियों, आकारों, अलंकारों ‌की पुनरावृत्ति रही है। समयानुसार कुछ नये तरह के रंगों का प्रयोग, कुछ नवीन भौतिक वस्तुओं का समावेश भी रहा है। लेकिन विचारधारा के स्तर पर आमतौर पर लोक कलाकार परंपराओं को निभाते हुए सोच और चिंतन के स्तर पर लकीर के फकीर होते हैं।

ऐसे में जनतांत्रिक समाज में कला संस्थानों से प्रशिक्षित आधुनिक प्रबुद्ध कलाकारों का महत्व बढ़ जाता है।

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