भोजपुरी सिनेमा को आजकल अश्लीलता से जोड़ा जाता है।
आज के दौर की फिल्मों के कई सीन और खासतौर पर गानों पर अश्लीलता के आरोप लगते रहते हैं, इसलिए कई दशक के बाद भी भोजपुरी इंडस्ट्री आज अपनी जगह तलाश रही है। हालांकि भोजपुरी सिनेमा हमेशा से ऐसा नहीं था- एक वक्त था जब इसे इसकी सादगी, संस्कृति और इमोशनल कहानियों के लिए जाना जाता था।
भोजपुरी फिल्मों में गांव की प्यारी कहानियां होती थीं जिससे लोग खुद को जोड़ते थे।
चलिए आज हम आपको बताते हैं देश में भोजपुरी सिनेमा की शुरुआत कैसे हुई और कैसे ये इंडस्ट्री पतन की तरफ बढ़ने लगी।
भोजपुरी फिल्मों का कनेक्शन देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के जमाने से जुड़ा हुआ है।
या फिर ऐसा कहें कि उन्हीं की देन है भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री।
उनके अलावा इस इंडस्ट्री को शुरू करने का श्रेय नजीर हुसैन को जाता है,
जो हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्टर थे।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और नजीर हुसैन जब मिले थे, तब भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की शुरुआत हुई थी।
कैसे इसके पीछे भी दिलचस्प किस्सा है।
बिहार के निवासी नाजिर हुसैन के सामने पहली भोजपुरी फिल्म बनाने की सबसे बड़ी चुनौती थी.
नाजिर हुसैन और विश्वनाथ प्रसाद ने मिलकर तय किया कि वे इस फिल्म का निर्देशन करेंगे.
इसके बाद, निर्देशन के लिए कुंदन कुमार को अंतिम रूप दिया गया.


