ये गुफाएँ महाराष्ट्र में औरंगाबाद के पास वाघोरा नदी के पास सह्याद्रि पर्वतमाला (पश्चिमी घाट) में रॉक-कट गुफाओं की एक श्रृंखला के रूप में स्थित हैं।
गुफाओं की संख्या: इसमें कुल 29 गुफाएँ (सभी बौद्ध) हैं,
जिनमें से 25 को विहार या आवासीय गुफाओं के रूप में जबकि 4 को चैत्य या प्रार्थना हॉल के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
गुफाओं का विकास 200 ई.पू. से 650 ईस्वी के मध्य हुआ था।
वाकाटक राजाओं जिनमें हरिसेना एक प्रमुख था, के संरक्षण में अजंता की गुफाएँ बौद्ध भिक्षुओं द्वारा उत्कीर्ण की गई थीं।
अजंता की गुफाओं की जानकारी चीनी बौद्ध यात्रियों फ़ाहियान (चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान 380- 415 ईस्वी) और ह्वेन त्सांग (सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान 606 – 647 ईस्वी) के यात्रा वृतांतों में पाई जाती है
एलोरा की गुफाओं के मंदिरों में सबसे उल्लेखनीय कैलासा (कैलासनाथ; गुफा संख्या 16) है, जिसका नाम हिमालय के कैलास पर्वत (हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव का निवास स्थान) के नाम पर रखा गया है।
एलोरा की बौद्ध, ब्राह्मण और जैन गुफाएँ मध्य भारत में पैठण (Paithan) से उज्जैन (Ujjain) जाने वाले व्यापारिक मार्ग पर बनाई गई थीं।


